परिचय
Surya pilgrimage · Puri district, Odisha में स्थित यह तीर्थ A thirteenth-century temple built as Surya's chariot, standing on the shore of the Bay of Bengal. से अपना विशिष्ट स्वरूप पाता है।
कोणार्क का सूर्य मंदिर ओडिशा के पुरी जिले में बंगाल की खाड़ी के तट पर स्थित है। इसका निर्माण तेरहवीं शताब्दी में नरसिंहदेव प्रथम (1238–1264 ई.) के शासनकाल में हुआ। परंपरा के अनुसार बारह वर्षों में लगभग बारह सौ शिल्पियों ने इसे गढ़ा। सम्पूर्ण मंदिर सूर्य के रथ के रूप में कल्पित है। चौबीस पहिये, जिनमें से प्रत्येक लगभग तीन मीटर व्यास का है, और सात अश्व इस रथ को गति देते प्रतीत होते हैं। मुख्य विमान उन्नीसवीं शताब्दी में नष्ट हो गया; आज जगमोहन और खुला नटमंदिर शेष हैं, जिन पर विस्तृत शिल्प अंकित है। यह स्थल 1984 से यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण में है। समुद्री नमकीन हवा, चक्रवात और बढ़ता पर्यटन इसके लिए चुनौती हैं, इसलिए निर्धारित मार्ग पर चलें, शिल्प को स्पर्श न करें और वर्तमान समय व नियम आधिकारिक स्रोत से जाँचें।
मंदिर को समझने के लिए केवल गर्भगृह ही नहीं, बल्कि उसके आसपास के भू-दृश्य, मार्ग, जलस्रोत, नगर या पर्वतीय परिवेश और जीवित पूजा-परंपराओं को भी देखें। ये सभी मिलकर उस अनुभव को रचते हैं जिसके कारण श्रद्धालु पीढ़ियों से यहाँ आते रहे हैं।
