परिचय
सारंगपुर, बोटाद जिला, गुजरात में स्थित यह तीर्थ अहमदाबाद से लगभग 153 किमी दूर सौराष्ट्र का तीर्थ-गाँव से अपना विशिष्ट स्वरूप पाता है।
गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में बोटाद जिले के सारंगपुर गाँव में स्थित यह मंदिर अहमदाबाद से लगभग 153 किलोमीटर दूर है। निकटतम रेलवे स्टेशन बोटाद जंक्शन है। यहाँ हनुमान की कष्टभंजन देव के रूप में उपासना होती है; 'कष्टभंजन' का अर्थ है कष्टों का नाश करने वाले। परंपरा के अनुसार विग्रह की प्रतिष्ठा सद्गुरु गोपालानंद स्वामी ने की थी। मंदिर स्वामिनारायण संप्रदाय की वडताल गादी से संबद्ध है और यह उस संप्रदाय का एकमात्र ऐसा मंदिर बताया जाता है जिसमें मुख्य विग्रह स्वामिनारायण या कृष्ण का नहीं है। हनुमान से जुड़े पर्वों और अवकाश के दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या अधिक हो सकती है। कतार, प्रसाद और वस्त्र से जुड़ी व्यवस्थाएँ समय-समय पर बदलती हैं, इसलिए यात्रा से पहले वर्तमान दर्शन-समय और नियम आधिकारिक स्रोत से जाँचें।
मंदिर को समझने के लिए केवल गर्भगृह ही नहीं, बल्कि उसके आसपास के भू-दृश्य, मार्ग, जलस्रोत, नगर या पर्वतीय परिवेश और जीवित पूजा-परंपराओं को भी देखें। ये सभी मिलकर उस अनुभव को रचते हैं जिसके कारण श्रद्धालु पीढ़ियों से यहाँ आते रहे हैं।
