परिचय
चित्रकूट, उत्तर प्रदेश में स्थित यह तीर्थ विस्तृत दृश्यों वाला खड़ी शिला के ऊपर मंदिर से अपना विशिष्ट स्वरूप पाता है।
चित्रकूट की ऊँची शिला पर स्थित हनुमान धारा तक खड़ी सीढ़ियों से पहुँचा जाता है। ऊपर से चित्रकूट का विस्तृत दृश्य और मार्ग में छोटे हनुमान विग्रह तीर्थ-यात्रा को क्रमिक अनुभव बनाते हैं। स्थानीय कथा इसे लंका-दहन के बाद हनुमान की दाह-शान्ति से जोड़ती है: श्रीराम के निर्देश पर प्रकट जलधारा ने उन्हें शीतलता दी। यह कथा पराक्रम के बाद शान्ति, सेवा के बाद विश्राम और प्रभु-कृपा का स्मरण कराती है। सीढ़ियाँ कठिन हो सकती हैं, इसलिए पानी, मौसम, धूप और अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें। धीरे चलें, मार्ग साफ रखें और वर्तमान पहुँच, रोपवे तथा दर्शन व्यवस्था आधिकारिक स्थानीय स्रोत से जाँचें।
मंदिर को समझने के लिए केवल गर्भगृह ही नहीं, बल्कि उसके आसपास के भू-दृश्य, मार्ग, जलस्रोत, नगर या पर्वतीय परिवेश और जीवित पूजा-परंपराओं को भी देखें। ये सभी मिलकर उस अनुभव को रचते हैं जिसके कारण श्रद्धालु पीढ़ियों से यहाँ आते रहे हैं।
