परिचय
दारागंज, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश में स्थित यह तीर्थ दारागंज में गंगा तट पर स्थित मंदिर से अपना विशिष्ट स्वरूप पाता है।
प्रयागराज के दारागंज क्षेत्र में गंगा तट पर स्थित यह मंदिर अपनी विशिष्ट शयन-मुद्रा वाली हनुमान प्रतिमा के लिए जाना जाता है। लगभग बीस फुट लंबी दक्षिणमुखी प्रतिमा धरातल से कम से कम छह फुट नीचे विराजमान है। प्रतिमा के दाहिने हाथ में श्रीराम और लक्ष्मण तथा बाएँ हाथ में गरुड़ का अंकन है। स्थानीय कथा के अनुसार लंका-विजय के बाद लौटते समय हनुमान को थकान हुई और माता सीता के कहने पर वे यहाँ विश्राम के लिए लेट गए। परंपरा यह भी स्मरण करती है कि वर्षों बाद गंगा का जल उतरने पर बाबा बालगिरि महाराज ने इस विग्रह को प्राप्त किया। नदी-तट पर स्थित होने के कारण स्नान-पर्वों पर यहाँ भीड़ बहुत बढ़ जाती है। गर्भगृह नीचे होने से कतार धीमी चल सकती है, इसलिए पर्याप्त समय रखें, सामान सुरक्षित रखें और वर्तमान दर्शन व सुरक्षा व्यवस्था आधिकारिक स्थानीय स्रोत से जाँचें।
मंदिर को समझने के लिए केवल गर्भगृह ही नहीं, बल्कि उसके आसपास के भू-दृश्य, मार्ग, जलस्रोत, नगर या पर्वतीय परिवेश और जीवित पूजा-परंपराओं को भी देखें। ये सभी मिलकर उस अनुभव को रचते हैं जिसके कारण श्रद्धालु पीढ़ियों से यहाँ आते रहे हैं।
