सरस्वतीकवचम्
Saraswati Kavach — Protective Verses
Thirteen protective verses from the Brahmavaivarta Purana, presented as devotional imagery without literal guarantees.
Dedicated toसरस्वतीॐ ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा शिरो मे पातु सर्वतः।श्रीं वाग्देवतायै स्वाहा भालं मे सर्वदाऽवतु ॥७३॥
ॐ सरस्वत्यै स्वाहेति श्रोत्रं पातु निरन्तरम्।ॐ श्रीं ह्रीं भारत्यै स्वाहा नेत्रयुग्मं सदाऽवतु ॥७४॥
ॐ ह्रीं वाग्वादिन्यै स्वाहा नासां मे सर्वतोऽवतु।ह्रीं विद्याधिष्ठातृदेव्यै स्वाहा श्रोत्रं सदाऽवतु ॥७५॥
ॐ श्रीं ह्रीं ब्राह्म्यै स्वाहेति दन्तपंक्तीः सदाऽवतु।ऐमित्येकाक्षरो मन्त्रो मम कण्ठं सदाऽवतु ॥७६॥
ॐ श्रीं ह्रीं पातु मे ग्रीवां स्कन्धं मे श्रीं सदाऽवतु।श्रीं विद्याधिष्ठातृदेव्यै स्वाहा वक्षः सदाऽवतु ॥७७॥
ॐ ह्रीं विद्यास्वरूपायै स्वाहा मे पातु नाभिकाम्।ॐ ह्रीं ह्रीं वाण्यै स्वाहेति मम पृष्ठं सदाऽवतु ॥७८॥
ॐ सर्ववर्णात्मिकायै पादयुग्मं सदाऽवतु।ॐ रागाधिष्ठातृदेव्यै सर्वाङ्गं मे सदाऽवतु ॥७९॥
ॐ सर्वकण्ठवासिन्यै स्वाहा प्राच्यां सदाऽवतु।ॐ ह्रीं जिह्वाप्रवासिन्यै स्वाहाऽग्निदिशि रक्षतु ॥८०॥
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं सरस्वत्यै बुधजनन्यै स्वाहा।सततं मन्त्रराजोऽयं दक्षिणे मां सदाऽवतु ॥८१॥
ॐ ह्रीं श्रीं त्र्यक्षरो मन्त्रो नैर्ऋत्यां मे सदाऽवतु।कविजिह्वाग्रवासिन्यै स्वाहा मां वारुणेऽवतु ॥८२॥
ॐ सदम्बिकायै स्वाहा वायव्ये मां सदाऽवतु।ॐ गद्यपद्यवासिन्यै स्वाहा मामुत्तरेऽवतु ॥८३॥
ॐ सर्वशास्त्रवासिन्यै स्वाहैशान्यां सदाऽवतु।ॐ सर्वपूजितायै स्वाहा चोर्ध्वं सदाऽवतु ॥८४॥
ऐं ह्रीं पुस्तकवासिन्यै स्वाहाऽधो मां सदाऽवतु।ॐ ग्रन्थबीजरूपायै स्वाहा मां सर्वतोऽवतु ॥८५॥
Sanskrit Wikisource — Brahmavaivarta Purana, Prakriti Khanda 4
Traditional public-domain Purana text; cited Wikisource transcription is CC BY-SA
Only verses 73–85, the protective core displayed on the source page, are included. Later benefit claims are not repeated as factual promises.