परिचय
Lakshmi heritage site · Orchha, Madhya Pradesh में स्थित यह तीर्थ A seventeenth-century temple-fort known for Bundeli and Mughal-influenced murals rather than an active central idol. से अपना विशिष्ट स्वरूप पाता है।
ओरछा का लक्ष्मी नारायण मन्दिर मुख्य राजमहल परिसर से बाहर ऊँचे स्थान पर मन्दिर और किले जैसी वास्तुकला को जोड़ता है। सत्रहवीं शताब्दी में बीर सिंह देव ने इसे बनवाया और बाद में पृथ्वी सिंह ने पुनर्स्थापित कराया। भीतर के भित्तिचित्र पवित्र कथाओं, दरबारी जीवन और ऐतिहासिक दृश्यों को बुन्देली तथा मुगल-प्रभावित शैली में जोड़ने के लिए प्रसिद्ध हैं। यह मुख्य विग्रह वाले सामान्य सक्रिय लक्ष्मी गर्भगृह की तरह कार्य नहीं करता। इसे पवित्र भवन के साथ संरक्षित धरोहर की तरह देखें। वर्तमान प्रवेश-समय जाँचें, चित्रों को न छुएँ और फ्लैश से बचें, चढ़ाई के लिए जल रखें तथा स्थानीय स्मारक-नियम मानें।
मंदिर को समझने के लिए केवल गर्भगृह ही नहीं, बल्कि उसके आसपास के भू-दृश्य, मार्ग, जलस्रोत, नगर या पर्वतीय परिवेश और जीवित पूजा-परंपराओं को भी देखें। ये सभी मिलकर उस अनुभव को रचते हैं जिसके कारण श्रद्धालु पीढ़ियों से यहाँ आते रहे हैं।
