Karni Mata Chalisa
श्री करणी माता चालीसा
The Hindi hymn to the Charan saint of Deshnok, which explains the rats in her temple as a bargain she struck with the god of death.
Dedicated toMaa Durgaजय गणेश जय गज बदन, करण सुमंगल मूल।करहू कृपा निज दास पर, रहहू सदा अनूकूल ॥
जय जननी जगदीश्वरी, कह कर बारम्बार।जगदम्बा करणी सुयश, वरणउ मति अनुसार ॥
सूमिरौ जय जगदम्ब भवानी।महिमा अकथन जाय बखानी ॥
नमो नमो मेहाई करणी।नमो नमो अम्बे दुःख हरणी ॥
आदि शक्ति जगदम्बे माता।दुःख को हरणि सुख कि दाता ॥
निरंकार है ज्योति तुम्हारी।तिहूं लोक फैलि उजियारो ॥
जो जेहि रूप से ध्यान लगावे।मन वांछित सोई फल पावे ॥
धौलागढ़ में आप विराजो।सिंह सवारी सन्मुख साजो ॥
भैरो वीर रहे अगवानी।मारे असुर सकल अभिमानी ॥
ग्राम सुआप नाम सुखकारी।चारण वंश करणी अवतारी ॥
मुख मण्डल की सुन्दरताई।जाकी महिमा कही न जाई ॥
जब भक्तों ने सुमिरण कीन्हा।ताही समय अभय करि दीन्हा ॥
साहूकार की करी सहाई।डूबत जल में नाव बचाई ॥
जब कान्हे न कुमति बिचारी।केहरि रूप धरयो महतारी ॥
मारयो ताहि एक छन मांई।जाकी कथा जगत में छाई ॥
नेड़ी जी शुभ धाम तुम्हारो।दर्शन करि मन होय सुखारो ॥
कर सौहै त्रिशूल विशाल।गल राजे पुष्प की माला ॥
शेखोजी पर किरपा कीन्ही।क्षुधा मिटाय अभय कर दीन्हा ॥
निर्बल होई जब सुमिरन कीन्हा।कारज सबि सुलभ कर दीन्हा ॥
देशनोक पावन थल भारी।सुन्दर मंदिर की छवि न्यारी ॥
मढ़ में ज्योति जले दिन राती।निखरत ही त्रय ताप नशाती ॥
कीन्ही यहाँ तपस्या आकर।नाम उजागर सब सुख सागर ॥
जय करणी दुःख हरणी मइया।भव सागर से पार करइया ॥
बार बार ध्याऊं जगदम्बा।कीजे दया करो न विलम्बा ॥
धर्मराज नै जब हठ कीन्हा।निज सुत को जीवित करि लीन्हा ॥
ताहि समय मर्याद बनाई।तुम पह मम वंशज नहि आई ॥
मूषक बन मंदिर में रहि है।मूषक ते पुनि मानुष तन धरि है ॥
दिपोजी को दर्शन दीन्हा।निज लिला से अवगत कीन्हा ॥
बने भक्त पर कृपा कीन्ही।दो नैनन की ज्योति दीन्ही ॥
चरित अमित अति कीन्ह अपारा।जाको यश छायो संसारा ॥
भक्त जनन को मात तारती।मगन भक्त जन करत आरती ॥
भीड़ पड़ी भक्तों पर जब ही।भई सहाय भवानी तब ही ॥
मातु दया अब हम पर कीजै।सब अपराध क्षमा कर दीजे ॥
मोको मातु कष्ट अति घेरो।तुम बिन कौन हरे दुःख मेरो ॥
जो नर धरे मात कर ध्यान।ताकर सब विधि हो कल्याण ॥
निशि वासर पूजहिं नर-नारी।तिनको सदा करहूं रखवारी ॥
भव सागर में नाव हमारी।पार करहु करणी महतारी ॥
कंह लगी वर्णऊ कथा तिहारी।लिखत लेखनी थकत हमारी ॥
पुत्र जानकर कृपा कीजै।सुख सम्पत्ति नव निधि कर दीजै ॥
जो यह पाठ करे हमेशा।ताके तन नहि रहे कलेशा ॥
संकट में जो सुमिरन करई।उनके ताप मात सब हरई ॥
गुण गाथा गाऊं कर जोरे।हरह मात सब संकट मोरे ॥
आदि शक्ति अम्बा सुमिर, धरि करणी का ध्यान।मन मंदिर में बास करो मैया, दूर करो अज्ञान ॥
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A chalisa to Karni Mata as a historical Charan woman turned goddess: the miracles told of her, the shrines along her route, and the bargain with Yama that the rats of Deshnok are held to follow from.