Aarti

Jai Ambe Gauri

जय अम्बे गौरी

One of the best-known Hindi aartis dedicated to Maa Durga and Jagadamba.

HindiOptional meaning7 min
Dedicated toMaa Durga
Sacred textOriginal Hindi

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥

माँग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।उज्ज्वल से दोऊ नैना, चन्द्रवदन नीको ॥

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।रक्तपुष्प गलमाला, कंठन पर साजै ॥

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।सुर नर मुनिजन सेवत, तिनके दुःखहारी ॥

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति ॥

शुम्भ निशुम्भ विदारे, महिषासुर घाती।धूम्रविलोचन नैना, निशिदिन मदमाती ॥

चण्ड मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।मधु कैटभ दोऊ मारे, सुर भयहीन करे ॥

ब्रह्माणी रुद्राणी, तुम कमला रानी।आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरू।बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू ॥

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।भक्तन की दुःख हरता, सुख सम्पत्ति करता ॥

भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी।मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ॥

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति ॥

श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै।कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै ॥

Continue exploring

Related prayers

Ambe Tu Hai Jagdambe Kali ↗Durga Deepa Arati ↗Durge Durghat Bhari ↗
Meaning & context

What does Jai Ambe Gauri mean?

The aarti praises Durga's form, power over destructive forces and compassion toward devotees. Its closing benefit language is devotional poetry rather than a guarantee of material results.