Chalisa

Gorakhnath Chalisa

श्री गोरखनाथ चालीसा

The Hindi hymn to the founder of the Nath yogis, which calls him Shiva's own descent and keeps the blunt command-idiom of the Nath mantras.

HindiOptional meaning11 min
Dedicated toLord Shiva
Sacred textOriginal Hindi

गणपति गिरजा पुत्र को, सुमिरूँ बारम्बार।हाथ जोड़ बिनती करूँ, शारद नाम आधार ॥

जय जय गोरख नाथ अविनासी।कृपा करो गुरु देव प्रकाशी ॥

जय जय जय गोरख गुण ज्ञानी।इच्छा रुप योगी वरदानी ॥

अलख निरंजन तुम्हरो नामा।सदा करो भक्तन हित कामा ॥

नाम तुम्हारा जो कोई गावे।जन्म जन्म के दुःख मिट जावे ॥

जो कोई गोरख नाम सुनावे।भूत पिसाच निकट नहीं आवे ॥

ज्ञान तुम्हारा योग से पावे।रुप तुम्हारा लख्या न जावे ॥

निराकर तुम हो निर्वाणी।महिमा तुम्हारी वेद न जानी ॥

घट घट के तुम अन्तर्यामी।सिद्ध चौरासी करे प्रणामी ॥

भस्म अंग गल नाद विराजे।जटा शीश अति सुन्दर साजे ॥

तुम बिन देव और नहीं दूजा।देव मुनि जन करते पूजा ॥

चिदानन्द सन्तन हितकारी।मंगल करुण अमंगल हारी ॥

पूर्ण ब्रह्म सकल घट वासी।गोरख नाथ सकल प्रकाशी ॥

गोरख गोरख जो कोई ध्यावे।ब्रह्म रुप के दर्शन पावे ॥

शंकर रुप धर डमरु बाजे।कानन कुण्डल सुन्दर साजे ॥

नित्यानन्द है नाम तुम्हारा।असुर मार भक्तन रखवारा ॥

अति विशाल है रुप तुम्हारा।सुर नर मुनि पावै न पारा ॥

दीन बन्धु दीनन हितकारी।हरो पाप हम शरण तुम्हारी ॥

योग युक्ति में हो प्रकाशा।सदा करो संतन तन वासा ॥

प्रातःकाल ले नाम तुम्हारा।सिद्धि बढ़ै अरु योग प्रचारा ॥

हठ हठ हठ गोरक्ष हठीले।मार मार वैरी के कीले ॥

चल चल चल गोरख विकराला।दुश्मन मार करो बेहाला ॥

जय जय जय गोरख अविनासी।अपने जन की हरो चौरासी ॥

अचल अगम है गोरख योगी।सिद्धि देवो हरो रस भोगी ॥

काटो मार्ग यम को तुम आई।तुम बिन मेरा कौन सहाई ॥

अजर-अमर है तुम्हारी देहा।सनकादिक सब जोरहिं नेहा ॥

कोटिन रवि सम तेज तुम्हारा।है प्रसिद्ध जगत उजियारा ॥

योगी लखे तुम्हारी माया।पार ब्रह्मा से ध्यान लगाया ॥

ध्यान तुम्हारा जो कोई लावे।अष्टसिद्धि नव निधि घर पावे ॥

शिव गोरख है नाम तुम्हारा।पापी दुष्ट अधम को तारा ॥

अगम अगोचर निर्भय नाथा।सदा रहो सन्तन के साथा ॥

शंकर रूप अवतार तुम्हारा।गोपीचन्द्र भरथरी को तारा ॥

सुन लीजो प्रभु अरज हमारी।कृपासिन्धु योगी ब्रह्मचारी ॥

पूर्ण आस दास की कीजे।सेवक जान ज्ञान को दीजे ॥

पतित पावन अधम अधारा।तिनके हेतु तुम लेत अवतारा ॥

अलख निरंजन नाम तुम्हारा।अगम पन्थ जिन योग प्रचारा ॥

जय जय जय गोरख भगवाना।सदा करो भक्तन कल्याना ॥

जय जय जय गोरख अविनासी।सेवा करै सिद्ध चौरासी ॥

जो ये पढ़हि गोरख चालीसा।होय सिद्ध साक्षी जगदीशा ॥

हाथ जोड़कर ध्यान लगावे।और श्रद्धा से भेंट चढ़ावे ॥

बारह पाठ पढ़ै नित जोई।मनोकामना पूर्ण होइ ॥

सुने सुनावे प्रेम वश, पूजे अपने हाथ।मन इच्छा सब कामना, पूरे गोरखनाथ ॥

अगम अगोचर नाथ तुम, पारब्रह्म अवतार।कानन कुण्डल सिर जटा, अंग विभूति अपार ॥

सिद्ध पुरुष योगेश्वरो, दो मुझको उपदेश।हर समय सेवा करुँ, सुबह शाम आदेश ॥

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Meaning & context

What does Gorakhnath Chalisa mean?

A chalisa to Gorakhnath as Shiva in a yogi's body: ash, matted hair and the nada horn, the eighty-four siddhas at his feet, and a pair of verses that switch from praise to command.