Bhajan

वैष्णव जन तो

Vaishnav Jan To

Narsinh Mehta defines a true Vaishnava through compassion, humility, truthful conduct, self-control and constant remembrance of Rama.

समर्पितभगवान कृष्ण
Sacred textOriginal Hindi

वैष्णव जन तो तेने कहिए जे पीड़ पराई जाणे रे।पर दुःखे उपकार करे तोये मन अभिमान न आणे रे ॥

सकल लोकमां सहुने वंदे, निंदा न करे केनी रे।वाच काछ मन निश्चल राखे, धन धन जननी तेनी रे ॥१॥

समदृष्टि ने तृष्णा त्यागी, परस्त्री जेने मात रे।जिह्वा थकी असत्य न बोले, परधन नव झाले हाथ रे ॥२॥

मोह माया व्यापे नहि जेने, दृढ़ वैराग्य जेना मनमां रे।राम नाम शुं ताली लागी, सकल तीरथ तेना तनमां रे ॥३॥

वणलोभी ने कपटरहित छे, काम क्रोध निवार्या रे।भणे नरसैयो तेनु दर्शन करतां, कुळ एकोतेर तार्या रे ॥४॥

भावार्थ

वैष्णव जन तो का अर्थ

Narsinh Mehta defines a true Vaishnava through compassion, humility, truthful conduct, self-control and constant remembrance of Rama.