प्रदोष-पूजा त्रयोदशी की संध्या से जुड़ी है। तिथि और प्रदोषकाल नगर के अनुसार बदलते हैं, इसलिए स्थानीय पंचांग या विश्वसनीय मंदिर-सूचना से समय जाँचें।
प्रदोष व्रत और सायं-पूजा मार्गदर्शिका
Pradosh Vrat & Evening Puja Guide
An evening Shiva observance focused on prayer, restraint and reflection.
समर्पितभगवान शिवसूर्यास्त से पहले स्नान या हाथ-मुँह धोकर स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा-स्थान पर शिव-पार्वती का चित्र या शिवलिंग, दीप, जल, पुष्प और सरल नैवेद्य रखें।
दीप जलाकर दिनभर के कर्मों को स्मरण करें और जाने-अनजाने हुए दोषों के लिए क्षमा माँगते हुए शांत संकल्प लें।
पहले गणेश, फिर नन्दी और शिव-पार्वती का स्मरण करें। नन्दी के भाव से धैर्यपूर्वक सुनना और प्रतीक्षा करना प्रदोष साधना का आन्तरिक संकेत माना जा सकता है।
ॐ नमः शिवाय के साथ स्वच्छ जल अर्पित करें। उपलब्धता और परंपरा के अनुसार चन्दन, पुष्प तथा बिल्वपत्र चढ़ाएँ; अनावश्यक सामग्री और अपव्यय से बचें।
11, 27 या अपनी क्षमता के अनुसार ॐ नमः शिवाय जप करें। आरोग्य और निर्भयता की प्रार्थना के लिए महामृत्युंजय मन्त्र भी पढ़ सकते हैं।
प्रदोष स्तोत्र, शिव चालीसा या छोटी शिव आरती में से एक पाठ चुनें। संख्या से अधिक एकाग्रता और उच्चारण की शांति को महत्व दें।
मौन में बैठकर दिन की एक भूल, एक कृतज्ञता और अगले दिन का एक सद्कर्म पहचानें। यही पूजा को व्यवहार से जोड़ता है।
आरती, प्रणाम और क्षमा-प्रार्थना के साथ समापन करें। प्रसाद बाँटें और यदि व्रत रखा हो तो स्वास्थ्य तथा पारिवारिक परंपरा के अनुसार पारण करें।