Bhajan
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो
Payo Ji Maine Ram Ratan Dhan Payo
A classic bhakti poem traditionally associated with Meerabai, celebrating the priceless treasure of Rama's name.
समर्पितभगवान रामपायो जी मैंने राम रतन धन पायो।
वस्तु अमोलक दी मेरे सतगुरु, कृपा कर अपनायो ॥
जनम जनम की पूँजी पाई, जग में सबै खोवायो ॥
खरचै न खूटै चोर न लूटै, दिन दिन बढ़त सवायो ॥
सत की नाव खेवटिया सतगुरु, भवसागर तर आयो ॥
मीरा के प्रभु गिरिधर नागर, हरख हरख जस गायो ॥
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो का अर्थ
The poem compares divine remembrance to an inexhaustible spiritual treasure received through the guru's grace.