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पंचमुख शिव

Panchamukha Shiva

An introduction to Shiva's five contemplative faces.

🔱समर्पितभगवान शिव

सद्योजात सृजन और नये आरम्भ की चेतना का स्मरण कराता है।

वामदेव सौम्यता, संरक्षण और सौन्दर्य का पक्ष है।

अघोर भय और द्वेष को करुणा तथा रूपान्तरण में बदलने की प्रेरणा है।

तत्पुरुष भीतर के साक्षी और अनुशासित ध्यान की ओर मोड़ता है।

ईशान ज्ञान, आकाशवत विस्तार और सर्वोच्च चेतना का प्रतीक है।

भावार्थ

पंचमुख शिव का अर्थ

An original BhajanDhara learning guide with Hindi reading text and bilingual explanatory support.