Aarti

ॐ जय जगदीश हरे

Om Jai Jagdish Hare

The widely sung Hindi aarti traditionally associated with Shardha Ram Phillauri.

समर्पितभगवान विष्णु
Sacred textOriginal Hindi

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे ॥

जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का।सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का ॥

मात पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी।तुम बिन और न दूजा, आस करूँ मैं जिसकी ॥

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी ॥

तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता।मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता ॥

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति ॥

दीनबन्धु दुःखहर्ता, ठाकुर तुम मेरे।अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे ॥

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा ॥

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे ॥

भावार्थ

ॐ जय जगदीश हरे का अर्थ

The aarti addresses Jagdish, the Lord of the universe, asking for refuge, compassion, devotion and freedom from suffering and harmful tendencies.