Chalisa

श्री काली चालीसा

Kali Chalisa

The longer Hindi hymn to Kali: twenty verses of names, the eighteen-armed battle form, the cremation-ground dance and the seats of power.

समर्पितमाँ काली
Sacred textOriginal Hindi

जय काली जगदम्ब जय, हरनि ओघ अघ पुंज।वास करहु निज दास के, निशदिन हृदय निकुंज ॥

जयति कपाली कालिका, कंकाली सुख दानि।कृपा करहु वरदायिनी, निज सेवक अनुमानि ॥

जय जय जय काली कंकाली।जय कपालिनी, जयति कराली ॥

शंकर प्रिया, अपर्णा, अम्बा।जय कपर्दिनी, जय जगदम्बा ॥

आर्या, हला, अम्बिका, माया।कात्यायनी उमा जगजाया ॥

गिरिजा गौरी दुर्गा चण्डी।दाक्षाणायिनी शाम्भवी प्रचंडी ॥

पार्वती मंगला भवानी।विश्वकारिणी सती मृडानी ॥

सर्वमंगला शैल नन्दिनी।हेमवती तुम जगत वन्दिनी ॥

ब्रह्मचारिणी कालरात्रि जय।महारात्रि जय मोहरात्रि जय ॥

तुम त्रिमूर्ति रोहिणी कालिका।कूष्माण्डा कार्तिका चण्डिका ॥

तारा भुवनेश्वरी अनन्या।तुम्हीं छिन्नमस्ता शुचिधन्या ॥

धूमावती षोडशी माता।बगला मातंगी विख्याता ॥

तुम भैरवी मातु तुम कमला।रक्तदन्तिका कीरति अमला ॥

शाकम्भरी कौशिकी भीमा।महातमा अग जग की सीमा ॥

चन्द्रघण्टिका तुम सावित्री।ब्रह्मवादिनी मां गायत्री ॥

रूद्राणी तुम कृष्ण पिंगला।अग्निज्वाला तुम सर्वमंगला ॥

मेघस्वना तपस्विनि योगिनी।सहस्राक्षि तुम अगजग भोगिनी ॥

जलोदरी सरस्वती डाकिनी।त्रिदशेश्वरी अजेय लाकिनी ॥

पुष्टि तुष्टि धृति स्मृति शिव दूती।कामाक्षी लज्जा आहूती ॥

महोदरी कामाक्षि हारिणी।विनायकी श्रुति महा शाकिनी ॥

अजा कर्ममोही ब्रह्माणी।धात्री वाराही शर्वाणी ॥

स्कन्द मातु तुम सिंह वाहिनी।मातु सुभद्रा रहहु दाहिनी ॥

नाम रूप गुण अमित तुम्हारे।शेष शारदा बरणत हारे ॥

तनु छवि श्यामवर्ण तव माता।नाम कालिका जग विख्याता ॥

अष्टादश तब भुजा मनोहर।तिनमहँ अस्त्र विराजत सुन्दर ॥

शंख चक्र अरू गदा सुहावन।परिघ भुशण्डी घण्टा पावन ॥

शूल बज्र धनुबाण उठाए।निशिचर कुल सब मारि गिराए ॥

शुंभ निशुंभ दैत्य संहारे।रक्तबीज के प्राण निकारे ॥

चौंसठ योगिनी नाचत संगा।मद्यपान कीन्हैउ रण गंगा ॥

कटि किंकिणी मधुर नूपुर धुनि।दैत्यवंश कांपत जेहि सुनि-सुनि ॥

कर खप्पर त्रिशूल भयकारी।अहै सदा सन्तन सुखकारी ॥

शव आरूढ़ नृत्य तुम साजा।बजत मृदंग भेरी के बाजा ॥

रक्त पान अरिदल को कीन्हा।प्राण तजेउ जो तुम्हिं न चीन्हा ॥

लपलपाति जिव्हा तव माता।भक्तन सुख दुष्टन दुःख दाता ॥

लसत भाल सेंदुर को टीको।बिखरे केश रूप अति नीको ॥

मुंडमाल गल अतिशय सोहत।भुजामल किंकण मनमोहन ॥

प्रलय नृत्य तुम करहु भवानी।जगदम्बा कहि वेद बखानी ॥

तुम मशान वासिनी कराला।भजत तुरत काटहु भवजाला ॥

बावन शक्ति पीठ तव सुन्दर।जहाँ बिराजत विविध रूप धर ॥

विन्धवासिनी कहूँ बड़ाई।कहँ कालिका रूप सुहाई ॥

शाकम्भरी बनी कहँ ज्वाला।महिषासुर मर्दिनी कराला ॥

कामाख्या तव नाम मनोहर।पुजवहिं मनोकामना द्रुततर ॥

चंड मुंड वध छिन महं करेउ।देवन के उर आनन्द भरेउ ॥

सर्व व्यापिनी तुम माँ तारा।अरिदल दलन लेहु अवतारा ॥

खलबल मचत सुनत हुँकारी।अगजग व्यापक देह तुम्हारी ॥

तुम विराट रूपा गुणखानी।विश्व स्वरूपा तुम महारानी ॥

उत्पत्ति स्थिति लय तुम्हरे कारण।करहु दास के दोष निवारण ॥

माँ उर वास करहू तुम अंबा।सदा दीन जन की अवलंबा ॥

तुम्हारो ध्यान धरै जो कोई।ता कहँ भीति कतहुँ नहिं होई ॥

विश्वरूप तुम आदि भवानी।महिमा वेद पुराण बखानी ॥

अति अपार तव नाम प्रभावा।जपत न रहन रंच दुःख दावा ॥

महाकालिका जय कल्याणी।जयति सदा सेवक सुखदानी ॥

तुम अनन्त औदार्य विभूषण।कीजिए कृपा क्षमिये सब दूषण ॥

दास जानि निज दया दिखावहु।सुत अनुमानित सहित अपनावहु ॥

जननी तुम सेवक प्रति पाली।करहु कृपा सब विधि माँ काली ॥

पाठ करै चालीसा जोई।तापर कृपा तुम्हारी होई ॥

जय तारा, जय दक्षिणा, कलावती सुखमूल।शरणागत 'भक्त' है, रहहु सदा अनुकूल ॥

भावार्थ

श्री काली चालीसा का अर्थ

A long chalisa to Kali that spends its first third purely on names, then turns to the eighteen-armed battle form, the dance on the corpse, and the seats where she is worshipped.