घटस्थापना नवरात्रि का पहला कर्म है और प्रतिपदा को, दिन के समय, अपने नगर के पंचांग के अनुसार की जाती है। स्थान ईशान कोण या पूजा-गृह में चुनें; भूमि स्वच्छ कर लें।
घटस्थापना — कलश स्थापना विधि
Ghatasthapana — Establishing the Kalash
The first rite of Navratri, set out step by step for an ordinary household shrine.
समर्पितमाँ दुर्गाएक चौड़े मिट्टी के पात्र में स्वच्छ मिट्टी की परत बिछाएँ और उसमें जौ के दाने बोएँ। थोड़ा जल छिड़कें। यही 'जवारे' नौ दिनों में उगते हैं और अन्न तथा वृद्धि के प्रतीक माने जाते हैं।
ताँबे या मिट्टी के कलश को जल से भरें। परम्परा के अनुसार उसमें सुपारी, कुछ सिक्के, अक्षत और दूर्वा डालें। कलश के कण्ठ पर मौली बाँधें।
कलश के मुख पर आम या अशोक के पाँच पत्ते रखें और उन पर जल-नारियल स्थापित करें। नारियल की जटा ऊपर रखने की प्रथा अधिकतर क्षेत्रों में है; स्थानीय परम्परा भिन्न हो तो उसी का पालन करें।
बोए हुए जौ के पात्र के मध्य कलश रखें। गणेश-स्मरण करें, फिर देवी का आवाहन करें — नौ दिनों तक इसी स्थान पर उनके सान्निध्य का संकल्प।
दीप प्रज्वलित करें। यदि अखण्ड दीप का संकल्प ले रहे हैं तो उसे सुरक्षित, स्थिर और ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें; घर में बच्चे या पालतू पशु हों तो विशेष सावधानी रखें।
अपनी परिचित प्रार्थना से पूजा आरम्भ करें — दुर्गा सप्तशती का पाठ, या अर्गला, कीलक और देवी कवच का क्रम, या केवल 'ॐ दुं दुर्गायै नमः' का जप। उच्चारण की स्पष्टता और स्थिर ध्यान सामग्री की मात्रा से अधिक महत्त्वपूर्ण हैं।
नौ दिनों तक प्रतिदिन जवारों पर थोड़ा जल दें और दीप-दर्शन करें। विजयादशमी पर जवारे काटकर परिवारजनों को दिए जाते हैं और कलश का जल घर में छिड़का जाता है — विधि क्षेत्र के अनुसार भिन्न है।
घटस्थापना — कलश स्थापना विधि का अर्थ
An original bilingual BhajanDhara guide written to distinguish inherited tradition, regional variation and practical safety.