Festival

छठ पूजा और सूर्य उपासना

Chhath Puja and Surya

A respectful introduction to the four-day observance centred on setting and rising Surya and Chhathi Maiya.

समर्पितसूर्य देव
Festival guideOriginal Hindi

छठ बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और प्रवासी समुदायों की गहरी लोक-परंपरा है। इसमें सूर्यदेव के साथ छठी मैया का पूजन होता है और अस्ताचलगामी तथा उदयमान—दोनों सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।

चार दिनों का सामान्य क्रम नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य है। परिवार और क्षेत्र के अनुसार गीत, प्रसाद, व्रत और सामग्री बदलते हैं; स्थानीय व्रती की परंपरा को प्रधान मानें।

ठेकुआ, फल, गन्ना और बाँस के सूप जैसे प्रसाद और पात्र सामुदायिक स्मृति का भाग हैं। इन्हें स्वच्छता से तैयार करें और नदी, तालाब या घाट पर प्लास्टिक तथा कृत्रिम सजावट न छोड़ें।

निर्जला व्रत अत्यन्त कठिन है। गर्भावस्था, मधुमेह, गुर्दे या हृदय की समस्या, दवा या अन्य स्वास्थ्य परिस्थिति में चिकित्सकीय सलाह और पारिवारिक मार्गदर्शन लें; भक्ति के लिए स्वास्थ्य को संकट में डालना आवश्यक नहीं।

घाट पर बैरिकेड, जल की गहराई, भीड़ और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करें। बच्चों और वृद्धों को अकेला न छोड़ें, और अर्घ्य देते समय सूर्य को सीधे न देखें।

भावार्थ

छठ पूजा और सूर्य उपासना का अर्थ

An original bilingual BhajanDhara guide written to distinguish inherited tradition, regional variation and practical safety.