Bhajan
भज गोविन्दम्
Bhaja Govindam
Adi Shankaracharya urges the mind to remember Govinda and loosen its attachment to possessions.
समर्पितभगवान विष्णुभज गोविन्दं भज गोविन्दं, गोविन्दं भज मूढमते।
सम्प्राप्ते सन्निहिते काले, नहि नहि रक्षति डुकृञ्करणे ॥
मूढ जहीहि धनागमतृष्णां, कुरु सद्बुद्धिं मनसि वितृष्णाम्।
यल्लभसे निजकर्मोपात्तं, वित्तं तेन विनोदय चित्तम् ॥