मंगलवार और शनिवार हनुमान की उपासना से विशेष रूप से जुड़े हैं। मंगलवार को साहस और बल का भाव प्रमुख है, शनिवार को रक्षा और संकट-निवारण का—दोनों दिनों की विधि प्रायः एक जैसी रहती है।
Tuesday & Saturday Hanuman Puja Vidhi
मंगलवार और शनिवार हनुमान पूजा विधि
A simple household worship sequence for the two days most associated with Hanuman.
Dedicated toLord Hanumanस्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा-स्थान साफ करें। हनुमान का चित्र या विग्रह, दीप, स्वच्छ जल, पुष्प, सिन्दूर, चमेली का तेल और सरल नैवेद्य पास रखें।
दीप जलाकर तीन शांत श्वास लें और संकल्प करें कि यह पूजा निर्भयता, संयम और किसी एक सेवा-कार्य के लिए है।
पहले श्रीराम और सीता का स्मरण करें, फिर हनुमान का ध्यान करें। हनुमान की पहचान परंपरा में राम-दूत और राम-भक्त के रूप में है, इसलिए यह क्रम महत्त्वपूर्ण माना जाता है।
स्वच्छ जल और पुष्प अर्पित करें। जहाँ परंपरा हो वहाँ सिन्दूर और चमेली के तेल का लेप विग्रह पर किया जाता है; घर के चित्र या धातु-विग्रह की स्थिति देखकर ही सामग्री का प्रयोग करें।
नैवेद्य में गुड़-चना, बूँदी, केला या घर का सात्त्विक भोजन रखें। कुछ क्षण बाद उसे प्रसाद रूप में बाँट दें; अनावश्यक सामग्री और अपव्यय से बचें।
हनुमान चालीसा का एक पाठ करें। समय हो तो बजरंग बाण या संकटमोचन हनुमानाष्टक जोड़ें; गिनती से अधिक स्पष्ट उच्चारण और स्थिर मन को महत्त्व दें।
पाठ के बाद कुछ क्षण मौन बैठें। भय, क्रोध या आलस्य में से किसी एक को पहचानें और आने वाले सप्ताह के लिए एक व्यावहारिक सुधार तय करें।
आरती और प्रणाम के साथ समापन करें। पूजा-स्थान साफ करें, अर्पित जल पौधे में दें और सामर्थ्य के अनुसार भोजन, जल या श्रम का दान करें—सेवा हनुमान-उपासना का केंद्रीय भाव है।
व्रत रखना अनिवार्य नहीं है। रखें तो स्वास्थ्य के अनुसार रखें; औषधि, गर्भावस्था या किसी रोग की स्थिति में उपवास से पहले चिकित्सकीय परामर्श लें।