Vrat Katha

Mangalvar Hanuman Vrat Katha

मंगलवार हनुमान व्रत कथा

The traditional Tuesday vrat narrative, retold plainly, with its regional variations noted.

HindiEnglishOptional meaning9 min
Dedicated toLord Hanuman
Vrat KathaOriginal Hindi

मंगलवार का व्रत हनुमान से जुड़ी सबसे प्रचलित साप्ताहिक परंपराओं में है। इसके साथ कही जाने वाली कथा लोक-परंपरा से आती है और क्षेत्र तथा परिवार के अनुसार बदलती रहती है।

प्रचलित कथा एक निःसन्तान ब्राह्मण दम्पति से आरम्भ होती है। पति वन में जाकर नियमपूर्वक हनुमान की उपासना करता था और सन्तान की प्रार्थना करता था।

पत्नी घर पर ही मंगलवार का व्रत रखती थी। कथा बताती है कि वह प्रत्येक मंगलवार भोजन से पहले हनुमान को भोग अर्पित करती और उसके बाद ही अन्न ग्रहण करती थी।

एक बार परिस्थितिवश वह भोग अर्पित किए बिना ही कई दिन बीत गए। अपने संकल्प के टूटने पर उसे गहरा पश्चात्ताप हुआ और उसने अगले मंगलवार तक निराहार रहकर क्षमा-प्रार्थना की।

कथा के अनुसार उसकी सच्ची लगन से प्रसन्न होकर हनुमान प्रकट हुए और उसे पुत्र का वरदान दिया। बालक का नाम मंगल रखा गया, क्योंकि वह मंगलवार के व्रत का फल था।

वन से लौटने पर ब्राह्मण को बालक पर संदेह हुआ और एक प्रसंग में उससे बड़ी भूल हो गई। तब हनुमान ने स्वयं प्रकट होकर सत्य बताया और दोनों की शंका दूर की।

कथा का निष्कर्ष सरल है: संकल्प में निरंतरता, भूल होने पर निष्कपट पश्चात्ताप, और अपने ही घर के प्रति संदेह से पहले धैर्य—यही व्रत का वास्तविक अभ्यास है।

यह कथा शास्त्र का प्रमाण-वाक्य नहीं, लोक-परंपरा की शिक्षाप्रद कथा है। इसके अनेक पाठ प्रचलित हैं; किसी एक रूप को अन्य से श्रेष्ठ मानना आवश्यक नहीं।

व्रत रखने वाले प्रायः कथा सुनने के बाद हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं, प्रसाद बाँटते हैं और सामर्थ्य के अनुसार कोई सेवा-कार्य करते हैं।

Meaning & context

What does Mangalvar Hanuman Vrat Katha mean?

An original BhajanDhara retelling of a traditional narrative. Versions of this katha differ between regions and families.