Chalisa

Mahakali Chalisa

श्री महाकाली चालीसा

The shorter Hindi hymn to Kali, which names Kalighat, Kamakhya, Hinglaj and the Vindhyas, and sets the Chandi's nine-syllable mantra into a verse.

HindiOptional meaning12 min
Dedicated toMaa Kali
Sacred textOriginal Hindi

जय जय सीताराम के, मध्यवासिनी अम्ब।देहु दर्श जगदम्ब, अब करहु न मातु विलम्ब ॥

जय तारा जय कालिका, जय दश विद्या वृन्द।काली चालीसा रचत, एक सिद्धि कवि हिन्द ॥

प्रातः काल उठ जो पढ़े, दुपहरिया या शाम।दुःख दरिद्रता दूर हों, सिद्धि होय सब काम ॥

जय काली कंकाल मालिनी।जय मंगला महाकपालिनी ॥

रक्तबीज वधकारिणी माता।सदा भक्तन की सुखदाता ॥

शिरो मालिका भूषित अंगे।जय काली जय मद्य मतंगे ॥

हर हृदयारविन्द सुविलासिनी।जय जगदम्बा सकल दुःख नाशिनी ॥

ह्रीं काली श्रीं महाकाराली।क्रीं कल्याणी दक्षिणाकाली ॥

जय कलावती जय विद्यावति।जय तारासुन्दरी महामति ॥

देहु सुबुद्धि हरहु सब संकट।होहु भक्त के आगे परगट ॥

जय ॐ कारे जय हुंकारे।महाशक्ति जय अपरम्पारे ॥

कमला कलियुग दर्प विनाशिनी।सदा भक्तजन की भयनाशिनी ॥

अब जगदम्ब न देर लगावहु।दुख दरिद्रता मोर हटावहु ॥

जयति कराल कालिका माता।कालानल समान द्युतिगाता ॥

जयशंकरी सुरेशि सनातनि।कोटि सिद्धि कवि मातु पुरातनि ॥

कपर्दिनी कलि कल्प विमोचनि।जय विकसित नव नलिन विलोचनी ॥

आनन्दा करणी आनन्द निधाना।देहुमातु मोहि निर्मल ज्ञाना ॥

करूणामृत सागरा कृपामयी।होहु दुष्ट जन पर अब निर्दयी ॥

सकल जीव तोहि परम पियारा।सकल विश्व तोरे आधारा ॥

प्रलय काल में नर्तन कारिणि।जग जननी सब जग की पालिनी ॥

महोदरी माहेश्वरी माया।हिमगिरि सुता विश्व की छाया ॥

स्वछन्द रद मारद धुनि माही।गर्जत तुम्ही और कोउ नाहि ॥

स्फुरति मणिगणाकार प्रताने।तारागण तू व्योम विताने ॥

श्रीधारे सन्तन हितकारिणी।अग्निपाणि अति दुष्ट विदारिणि ॥

धूम्र विलोचनि प्राण विमोचिनी।शुम्भ निशुम्भ मथनि वर लोचनि ॥

सहस भुजी सरोरूह मालिनी।चामुण्डे मरघट की वासिनी ॥

खप्पर मध्य सुशोणित साजी।मारेहु माँ महिषासुर पाजी ॥

अम्ब अम्बिका चण्ड चण्डिका।सब एके तुम आदि कालिका ॥

अजा एकरूपा बहुरूपा।अकथ चरित्र तव शक्ति अनूपा ॥

कलकत्ता के दक्षिण द्वारे।मूरति तोरि महेशि अपारे ॥

कादम्बरी पानरत श्यामा।जय मातंगी काम के धामा ॥

कमलासन वासिनी कमलायनि।जय श्यामा जय जय श्यामायनि ॥

मातंगी जय जयति प्रकृति हे।जयति भक्ति उर कुमति सुमति हे ॥

कोटि ब्रह्म शिव विष्णु कामदा।जयति अहिंसा धर्म जन्मदा ॥

जलथल नभ मण्डल में व्यापिनी।सौदामिनी मध्य आलापिनि ॥

झननन तच्छु मरिरिन नादिनी।जय सरस्वती वीणा वादिनी ॥

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।कलित कण्ठ शोभित नरमुण्डा ॥

जय ब्रह्माण्ड सिद्धि कवि माता।कामाख्या और काली माता ॥

हिंगलाज विन्ध्याचल वासिनी।अट्टहासिनी अरु अघन नाशिनी ॥

कितनी स्तुति करूँ अखण्डे।तू ब्रह्माण्डे शक्तिजित चण्डे ॥

करहु कृपा सब पे जगदम्बा।रहहिं निशंक तोर अवलम्बा ॥

चतुर्भुजी काली तुम श्यामा।रूप तुम्हार महा अभिरामा ॥

खड्ग और खप्पर कर सोहत।सुर नर मुनि सबको मन मोहत ॥

तुम्हारी कृपा पावे जो कोई।रोग शोक नहिं ताकहँ होई ॥

जो यह पाठ करै चालीसा।तापर कृपा करहिं गौरीशा ॥

जय कपालिनी जय शिवा, जय जय जय जगदम्ब।सदा भक्तजन केरि दुःख हरहु, मातु अविलम्ब ॥

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Meaning & context

What does Mahakali Chalisa mean?

A chalisa to Kali as she is worshipped at named shrines — Kalighat, Kamakhya, Hinglaj, the Vindhyas — with the Chandi navarna mantra written into the middle of it.