The Sindoor Offering
सिन्दूर अर्पण की परंपरा
The story behind Hanuman's sindoor, and how the custom is kept respectfully.
Dedicated toLord Hanumanअनेक हनुमान मंदिरों में विग्रह पर सिन्दूर और चमेली के तेल का लेप किया जाता है; यह उत्तर भारत की सबसे पहचानी जाने वाली परंपराओं में है।
लोक-कथा के अनुसार हनुमान ने माता सीता को सिन्दूर लगाते देखा और उसका कारण जानकर स्वयं पूरे शरीर पर सिन्दूर लगा लिया—यह भक्ति की सरलता और पूर्णता का प्रतीक माना जाता है।
यह कथा लोक-परंपरा से आती है और विभिन्न क्षेत्रों में इसके रूप भिन्न हैं; इसे शास्त्रीय प्रमाण की तरह प्रस्तुत करना उचित नहीं।
घर की पूजा में सामग्री का प्रयोग विग्रह या चित्र की स्थिति देखकर करें। काग़ज़ के चित्र, धातु और पत्थर की प्रतिमा—तीनों की आवश्यकता अलग होती है।
मंदिरों में सिन्दूर अर्पण की अपनी व्यवस्था होती है। कहीं पुजारी ही लेप करते हैं, कहीं श्रद्धालु; स्थानीय नियम का पालन करें।
परंपरा का सार दिखावा नहीं, समर्पण है। सामग्री उपलब्ध न हो तो श्रद्धापूर्वक प्रणाम भी पूर्ण अर्पण माना जाता है।